रामधनी
तूं पत्थर तो नहीं है फिर पिघलता क्यों नहीं मुझसे
कैसे कहते हो कहो फिर मज़ा नहीं आया
तुम
पेड़ों ने नए इल्म गढ़े पंछियों के बीच
आज का दिन
पिता की मौत