मुहब्बत में कई बातें ज़रूरी हैं मगर मुहब्बत क्या है, इससे भी ज़रूरी, क्या नहीं है . मुहब्बत डर नहीं है, ख़ुदा का घर नहीं है मुहब्बत फैज़ अहमद फैज़ है, हिटलर नहीं है मुहब्बत मस्त है लेकिन महज़ बिस्तर नहीं है कोई सरहद नहीं है, कोई बंदिश नहीं है मुहब्बत कुछ भी हो जाए, कोई साज़िश नहीं है . मुहब्बत में कई बातें.... मुहब्बत कोई दुश्वारी नहीं है मुहब्बत कोई बीमारी नहीं है मुहब्बत ख़ूब सूरत शय है जिसमें, कहीं भी कोई हुशियारी नहीं है मुहब्बत में नहीं है नाउमीदी, म…
सुनो तुम ए ! सुनो नादान लड़की ! बिछड़ जाने के बरसों बाद भी तुम ख़यालों मे , कहो कैसे चली आई ! तुम्हारी आदतें उफ ! कि इतनी बेतकल्लुफ़ ! तुम्हारी ये कटोरी जैसी आँखें अभी भी , आज , बरसों बाद , अब भी बड़ी हैरत से मुझको ताकती हैं जहां तक मैं न पहुंचा , मेरे अंदर वहाँ भी झाँकती हैं। तुम्हें क्या याद है अब भी ! मुहब्बत का सलीका बारहा मुझको सिखाती थी जो मुझसे हो नहीं पाता था और तुम हार जाती थी तुम अब हारे हुये मुझपर हमेशा मुसकुराती हो सिखाया था मुझे जो आज खुद ही भूल जाती हो ! …

Writer, Assistant Professor, Hindi Department, Central University of Jharkhand, Ranchi
Let's Get Connected:- Twitter | Facebook | Google Plus | Linkedin | Pinterest
Social Plugin